आजाद परिंदों को लुभाती है कैद

यह तो दुनिया का दस्तूर है ,की जिस के पास जो नहीं होता उसे उसी की चाहत होती है .
यहाँ पर यह बात बिलकुल सही साबित होती है की "घर की मुर्गी दल बराबर " अर्थात जो है उसकी कद्र नहीं होती । हम आज़ादी को भी इसी ढंग से समझना चाहते है।

आज के इस आधुनिक युग में जहाँ पुराने ज़माने की खामियों को दूर किया है, वही इसने मर्यादा या दूसरी चीजो की गुलामी से आजादी भी दिलाई है । जहाँ कुछ समय पहले तक युवाओ को कई तहर की इजाजत लेनी होती होती थी ,वही आज ऐसा नहीं आज का युवा हर तरह से स्वतंत्रता की जिंदगी जी रहा है ।
आज युवाओ को हर तरह की आज़ादी प्राप्त है भले ही वह देर रात तक दोस्तों क साथ घूमना हो या ऑफिस में काम निपटाना । यह सारी चीजे युवाओ को दिमागी शांति तो देती है , पर मन आज भी बेचैन है । कारण है, वो बंदिशे जिन्हें वे आज अपनी जिंदगी में चाहकर भी अपना नहीं सकते हाँ ये युवा चाहते है, की आज कोई इनको डांटे ,इनकी परवाह करे , अर्थात "आजाद परिंदों को लुभाती है कैद "
आज करियर बनाने के लिए युवाओ को घर से दूर रहन पढ़ रहा है ,एक अजनबीसी
दुनिया का हिस्सा बनना पड़ता है जहाँ हर कोई नया है । आज की इस प्रोफ़ेस्सिओनल लाइफ में लोगो के पास समय नहीं दुसरो के लिए ऐसे में याद आती है वो बंदिशे जो असल में हमारी परवाह का हिस्सा हुआ करती थी ।पापा का देर से आने पर डांटना , माँ का न खाने पर गुस्सा होना ।
आज का युवा आज़ाद है हर तरह से भले ही वो सोच की आज़ादी हो या अपने ढंग से जीने की हम आज़ाद है , आज हमारे दोस्त हमारे माँ पापा तेय नहीं करते , पर जब हमे दोस्तों से धोका मिलता हमे सिर्फ मोम डैड याद आते है । हम बहार जा कर क्या खाते है ये वो हमे नहीं बताते पर हमे हमेशा इन्तेजार रहता है की माँ का फ़ोन आएगा और वे कहेंगी बेटा घर जल्दी से आना खाने पर तुम्हारा हम इंतज़ार करेंगे ।

Comments

  1. ब्लॉगिंग की दुनिया में पहला कदम बढ़ाने पर साधुवाद!!!

    शुरूआती विचारों की धार अच्छी है! उम्मीद है आगे भी और अधिक सधे शब्दों में कुछ ऐसे ही abstract thoughts पढ़ने को मिलेंगे।
    फिलहाल बधाइयाँ।

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  2. good yaar ur work is a mixture of sentimental nostalgia and current individual mindset .... keep on writing ....

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