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Showing posts from 2010

आतंकवाद

२० वी सदी से चले आ रहे ,आतंकवाद का कही कोई अंत नज़र नहीं आता ,जब लगता काबू में सब कुछ, दूर कही फिर कोई धमाका होजाता । त्योहारों के माहोल में अब कभी भी नज़र आता आतंकवाद है । मिलो तक फेली खुशहाली को तबाह करता आतंकवाद है । कहाँ से पनपा कहाँ से आया यह शब्द आतंकवाद है । चाहे भारतीय मरे या पाकिस्तानी मरता एक इन्सान है । आतंकवाद ने दुनिया को बाटा या बटे हुए संसार में पनपा आतंकवाद है । दुनिया को जिसने हिलाके रखा ,चौका के रखा वह आतंकवाद है । कोई कहता पश्चिम की देन ,तो कोई कहता अपने ही बिच से पनपा ये आतंकवाद है । दुनिया खिलाफ है आतंकवाद के पर क्या कर रही है ,हटा रही है आतंकवादियों को । महात्मा गाँधी ने कहा है " बुरे व्यक्ति से नहीं उसकी बुराई से नफरत करो ",उसकी बुराई को दूर करो। तो यह महात्मा गाँधी का देश क्यूँ भुला उनका ये सबक है । कुछ दिनों पहले पाकिस्तान की कुछ सचिव भारत के दौरे पर आये थे ,वे यहाँ मुंबई में हुए आतंकी हमलो पर चर्चा करने वाले थे , ऐसी कोई चर्चा उनके और भारत के सचिव के बिच नहीं हो पाई । कारन समझ से परे है , आखिर...

आजाद परिंदों को लुभाती है कैद

यह तो दुनिया का दस्तूर है ,की जिस के पास जो नहीं होता उसे उसी की चाहत होती है . यहाँ पर यह बात बिलकुल सही साबित होती है की "घर की मुर्गी दल बराबर " अर्थात जो है उसकी कद्र नहीं होती । हम आज़ादी को भी इसी ढंग से समझना चाहते है। आज के इस आधुनिक युग में जहाँ पुराने ज़माने की खामियों को दूर किया है, वही इसने मर्यादा या दूसरी चीजो की गुलामी से आजादी भी दिलाई है । जहाँ कुछ समय पहले तक युवाओ को कई तहर की इजाजत लेनी होती होती थी ,वही आज ऐसा नहीं आज का युवा हर तरह से स्वतंत्रता की जिंदगी जी रहा है । आज युवाओ को हर तरह की आज़ादी प्राप्त है भले ही वह देर रात तक दोस्तों क साथ घूमना हो या ऑफिस में काम निपटाना । यह सारी चीजे युवाओ को दिमागी शांति तो देती है , पर मन आज भी बेचैन है । कारण है, वो बंदिशे जिन्हें वे आज अपनी जिंदगी में चाहकर भी अपना नहीं सकते हाँ ये युवा चाहते है, की आज कोई इनको डांटे ,इनकी परवाह करे , अर्थात "आजाद परिंदों को लुभाती है कैद " आज करियर बनाने के लिए युवाओ को घर से दूर रहन पढ़ रहा है ,एक अजनबीसी दुनिया का हिस्सा बनना पड़ता है जहाँ ह...